डोनाल्ड ट्रम्प ने 1 नवंबर से चीन पर 100% टैरिफ, एपीसी शिखर सम्मेलन रद्द

जब डोनाल्ड ट्रम्प, संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति ने 10 अक्टूबर 2025 को लगभग 1:30 वजे ट्रुथ सोशल पर घोषणा की, तो यह खबर तुरंत वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए चेतावनी बन गई। उसी पोस्ट में उन्होंने कहा कि चीन ने ‘वैश्विक निर्यात प्रतिबंध’ की योजना बनाई है, जिससे दुर्लभ पृथ्वी धातुओं सहित लगभग सभी चाइनीज़‑निर्मित सामान विश्व बाजार से बाहर हो जाएंगे। ट्रम्प ने बताया कि 1 नवंबर 2025 से संयुक्त राज्य सभी चीनी आयातों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाएगा और साथ‑साथ सभी महत्वपूर्ण सॉफ़्टवेयर के निर्यात को रोक देगा। यह कदम अमेरिकी‑चीनी व्यापार में अब तक की सबसे तीव्र वृद्धि माना जा रहा है।

पृष्ठभूमि और अद्यतन स्थिति

ट्रम्प की इस घोषणा से पहले, दोनों देशों के बीच 90‑दिन का ट्रीसू वैध रहा था, जिसका विस्तार अगस्त 11, 2025 तक हुआ था। उस समझौते के तहत अमेरिकी टैरिफ 30 प्रतिशत और चीनी टैरिफ 10 प्रतिशत पर स्थिर थे। पहले के समय में दोनों पक्षों ने एक‑दूसरे के ऊपर 145 और 125 प्रतिशत के भारी टैरिफ लगा रखे थे, लेकिन आर्थिक दबाव ने अंततः उन्हें धीरज दिखाने के लिए मजबूर कर दिया।

सही में, इस नई नीति के लिए हॉवर्ड लुटनिक, जो अमेरिकी वाणिज्य विभाग के सचिव हैं, और जेमीसन ग्रेयर, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय के एम्बेस्डर, उन्हें इस कदम को लागू करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। वे दोनों इस बात पर जोर दे रहे हैं कि अगर बीजिंग ने अपनी नीति को बदला नहीं, तो ये कदम तुरंत लागू हो सकते हैं।

बाजार पर तत्काल प्रभाव

घोषणा के बाद NASDAQ कम्पोज़िट इंडेक्स में 3.6 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि S&P 500 ने 2.7 प्रतिशत हार मानी। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्तर की गिरावट को ‘अभी तक का सबसे कठिन दिन’ कहा जा रहा है, क्योंकि निवेशकों को दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच फिर से युद्ध की सम्भावना दिख रही है। इस झटके के कारण डॉलर के मुकाबले युआन की कीमत भी गिरने की आशंका है, जबकि तेल की कीमतों पर भी असर पड़ने की संभावना है, क्योंकि चीन विश्व का प्रमुख ऊर्जा आयातक है।

  • टैरिफ प्रभावी होने की तिथि: 1 नवंबर 2025
  • लागू टैरिफ दर: 100 प्रतिशत
  • निर्यात प्रतिबंध: सभी गंभीर सॉफ़्टवेयर
  • निर्णायक कारक: चीन की संभावित निर्यात प्रतिबंध योजना
  • मुख्य आर्थिक संकेतक: NASDAQ -3.6 %, S&P 500 -2.7 %

राजनीतिक और कूटनीतिक प्रभाव

ट्रम्प ने अपनी घोषणा में स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह दो हफ्ते बाद कोरिया में होने वाले एशिया‑प्रशांत आर्थिक सहयोग (APEC) शिखर सम्मेलन में शी जिंपिंग के साथ निर्धारित मुलाक़ात को निरस्त करने पर विचार कर रहे हैं। यदि यह कदम लागू हुआ तो एपीसी सम्मेलन में कई बड़े व्यापारिक समझौते टाल दिए जा सकते हैं। वास्तव में, इस मुलाक़ात की तैयारी में संयुक्त राज्य के प्रतिनिधिमंडल ने पहले से ही कई हाई‑टेक और पर्यावरणीय परियोजनाओं को लेकर चर्चा शुरू कर रखी थी।

बीजिंग में वाणिज्य मंत्रालय ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन विभिन्न स्रोतों से पता चलता है कि वे इस कदम को ‘बिल्कुल अप्रत्याशित’ और ‘अंतिम उपाय’ मानते हुए गहन विचार‑विमर्श कर रहे हैं।

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर दीर्घकालिक असर

वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर दीर्घकालिक असर

दुर्मिळ पृथ्वी कठोर धातुएँ (Rare Earth Elements) आज आधुनिक तकनीकी उत्पादन—जैसे स्मार्टफ़ोन, इलेक्ट्रिक कार, सैटेलाइट और सैन्य हार्डवेयर—का अभिन्न हिस्सा हैं। चीन इस खनिज के 60 से अधिक प्रतिशत के उत्पादन का नियंत्रण रखता है। अगर चीन ने वास्तव में ‘वैश्विक निर्यात प्रतिबंध’ लागू किया, तो अमेरिकी कंपनियों को वैकल्पिक स्रोत खोजने में भारी लागत और समय लग सकता है। इस स्थिति में यूरोपीय देशों ने भी पहले से ही वैकल्पिक सप्लाई चेन विकसित करने की योजना बनायी हुई थी, पर अभी तक वह पूरी तरह कार्यान्वित नहीं हुई।

इसके अलावा, इस टैरिफ नीति से न केवल इलेक्ट्रॉनिक उद्योग बल्कि नवीकरणीय ऊर्जा, एयरोस्पेस और रक्षा उद्योग पर भी प्रभाव पड़ेगा। विशेषज्ञ अनुमान लगाते हैं कि अगले दो‑तीन वर्षों में वैश्विक निर्माण लागत में 5‑10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है, यदि विकल्पीय सप्लाई चेन न बनाई गई तो।

आगे क्या हो सकता है?

इसे देखते हुए, कई आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले हफ्तों में बीजिंग ने एपीसी सम्मेलन से पहले अपना रुख बदलने की कोशिश की होगी। यदि चीन ने निर्यात प्रतिबंध को वापस खींच लिया, तो संभवतः दोनों देशों के बीच नए व्यापार समझौते की राह खुल सकती है। अन्यथा, अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय अगले कदमों की सूची तैयार कर रहा है—जिसमें चीनी वस्तुओं पर अतिरिक्त प्रतिबंध और संभावित द्विपक्षीय अनुदान शामिल हो सकते हैं।

वित्तीय बाजारों में अभी तक स्पष्ट संकेत नहीं दिख रहा है कि कौन सी दिशा तय होगी, पर इस मौजूदा अस्थिरता के बीच निवेशकों को जोखिम‑प्रबंधन की रणनीति दोबारा सोचनी पड़ेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

टैरिफ लागू होने पर अमेरिकी कंपनियों को कौन‑सी चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा?

उच्च टैरिफ का मतलब है कि चीन से आयातित कच्चे माल और घटक लागत में 100 प्रतिशत वृद्धि होगी। इससे इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल और वैॉरपोर्ट सेक्टर में प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ेंगी, और कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत खोजने या घरेलू उत्पादन को तेज करने की जरूरत पड़ेगी।

क्या एपीसी शिखर सम्मेलन रद्द हो सकता है?

डोनाल्ड ट्रम्प ने पहले ही कहा है कि यदि चीन अपनी निर्यात प्रतिबंध नीति नहीं बदलता, तो वह शी जिंपिंग के साथ मुलाक़ात रद्द कर सकते हैं। इसलिए शिखर सम्मेलन में प्रमुख व्यापार चर्चाएँ टल सकती हैं, लेकिन पूरी तरह से रद्द होने की संभावना अभी भी अनिश्चित है।

दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की आपूर्ति में व्यवधान से वैश्विक उद्योग पर क्या असर पड़ेगा?

चीन विश्व का प्रमुख दुर्लभ पृथ्वी धातु उत्पादनकर्ता है। यदि वह निर्यात प्रतिबंध लागू करता है, तो सैमसंग, टेस्ला जैसे कंपनियों को उत्पादन लाइन बंद या धीमी करनी पड़ सकती है, और कीमतें 20‑30 प्रतिशत तक बढ़ सकती हैं। यूरोपीय और अमेरिकी कंपनियों ने वैकल्पिक खनन परियोजनाओं में निवेश शुरू कर दिया है, लेकिन उनका प्रभाव आने में कई साल लगेंगे।

क्या इस टैरिफ से अमेरिकी उपभोक्ता पर सीधे असर पड़ेगा?

हाँ, बहुत संभव है। चीन से आयातित इलेक्ट्रॉनिक सामान, कपड़े और घरेलू उपकरणों की कीमतें बढ़ेंगी। इसके साथ ही, उच्च उत्पादन लागत को अंत में उपभोक्ता को कीमतों में जोड़ना पड़ेगा, जिससे महंगाई में थोड़ी हवा चल सकती है।

लोग टिप्पणियाँ

  • Hansraj Surti
    Hansraj Surti अक्तूबर 13, 2025 AT 23:23

    ट्रम्प का नारा एक नयी वैश्विक व्यापार युद्ध की दहलीज पर खड़ा है। वह 1 नवंबर से चीनी सामान पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का इरादा रखता है। इस कदम ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में लहरें खड़ी कर दी हैं। एशिया‑प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन का भी छाया में गिरना अभूतपूर्व है। यूएस ने इसे चीन की निर्यात प्रतिबंध नीति के जवाब में बताया है। दुर्लभ पृथ्वी धातुओं की आपूर्ति में बाधा कई उद्योगों को तरंगित करेगी। इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतें आसमान छू सकती हैं। ऑटोमोटिव सेक्टर भी इस आर्थिक तनाव से गुजर रहा है। निवेशकों के लिए जोखिम प्रबंधन अब एक प्राथमिकता बन गया है। अमेरिकी डॉलर की मजबूती इस नीति से कुछ हद तक स्थिर रह सकती है। लेकिन युआन की गिरावट आर्थिक धुरी को बदल सकती है। वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी अस्थिरता के संकेत मिल रहे हैं। एपीसी शिखर सम्मेलन को रद्द करने की संभावना राजनीति को और जटिल बना देगी। चीन को अगर अपनी निर्यात प्रतिबंध नीति को बदलना पड़े तो नयी बातचीत की राह खुल सकती है। अंत में यह देखना होगा कि दोनों पक्ष कैसे समझौता करते हैं 😊

  • Naman Patidar
    Naman Patidar अक्तूबर 14, 2025 AT 00:29

    ट्रम्प की चाल बहुत ही खतरनाक है।

  • Manish Mistry
    Manish Mistry अक्तूबर 14, 2025 AT 01:36

    ट्रम्प का यह निर्यात्मक बयान रणनीतिक रूप से कमजोर लगता है क्योंकि वह अंतरराष्ट्रीय मानदंडों को अनदेखा कर रहा है।

  • Rashid Ali
    Rashid Ali अक्तूबर 14, 2025 AT 02:43

    वास्तव में इस तरह की टैरिफ नीति दोनों देशों के सांस्कृतिक एवं आर्थिक रिश्तों को बिगाड़ सकती है। हमें इस तनाव को कूटनीतिक संवाद के माध्यम से हल करना चाहिए। यदि दोनों पक्ष मिलकर वैकल्पिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करें तो नुकसान को कम किया जा सकता है। यह अवसर है कि सहयोगी पहलें आगे बढ़ें। आशा है कि भविष्य में समझौता होगा।

  • Tanvi Shrivastav
    Tanvi Shrivastav अक्तूबर 14, 2025 AT 03:49

    ओह, कितना शानदार विचार! सिर्फ टैरिफ से सब समस्याएँ हल हो जाएँगी, है ना? 🙄 यह सोच वास्तविकता से बहुत दूर है। आर्थिक वास्तविकता में ऐसे कदम सिर्फ अस्थायी उबराव देते हैं।

  • Ayush Sanu
    Ayush Sanu अक्तूबर 14, 2025 AT 04:56

    ट्रम्प की नीति से अमेरिकी कंपनियों को वैकल्पिक आपूर्ति स्रोत खोजने में उच्च लागत और समय निवेश करना पड़ेगा।

  • Prince Naeem
    Prince Naeem अक्तूबर 14, 2025 AT 06:03

    व्यापार युद्ध का अंतर्दृष्टि अक्सर मानवता के दीर्घकालिक विकास को बाधित करती है।

  • Anil Puri
    Anil Puri अक्तूबर 14, 2025 AT 07:09

    वास्तव में टैरिफ को बढ़ाकर कोई समाधान नहीं निकलेगा; यह केवल दो पक्षों के बीच तनाव को बढ़ाएगा। कई विशेषज्ञ इसको आर्थिक नरक कहते हैं। यदि चीन अपनी नीति नहीं बदलता तो दोनों economies को हानि होगी।

  • Yogitha Priya
    Yogitha Priya अक्तूबर 14, 2025 AT 08:16

    क्या ट्रम्प असल में चीन की साजिश को रोकने की कोशिश कर रहा है या बस अपने वोट बढ़ाने के लिये इसको बढ़ावा दे रहा है? यह पूरा मामला घातक साजिश जैसा लगता है।

  • Rajesh kumar
    Rajesh kumar अक्तूबर 14, 2025 AT 09:23

    भारत को इस स्थिति में अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देनी चाहिए। अमेरिका की इस टैरिफ नीति से चीन को नुकसान तो होगा, लेकिन भारत को भी सावधानी बरतनी होगी। हमें किसी भी विदेशी दबाव के बिना अपने आर्थिक आत्मनिर्भरता को बढ़ाना चाहिए। इस फँसी हुई स्थिति को देख कर मुझे लगता है कि अंतरराष्ट्रीय मंचों में भारत अधिक सक्रिय होना चाहिए। अगर अमेरिका चीनी उत्पादों को बंद कर देगा तो हमारी आयात लागत में बढ़ोतरी होगी। इसलिए हमें अपने घरेलू उद्योग को सुदृढ़ करने की दिशा में निवेश करना चाहिए। अंत में, हमारी सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता सर्वोपरि है।

  • One You tea
    One You tea अक्तूबर 14, 2025 AT 10:29

    भाई, ट्रम्प का ये कदम हमारी आर्थिक आज़ादी के लिए खतरा बन सकता है। अगर यूरोप और चीन साथ मिलें तो हम फँस सकते हैं। इस तरह की नीतियों को देख कर भारत को अपनी रणनीति बदलनी चाहिए।

  • Hemakul Pioneers
    Hemakul Pioneers अक्तूबर 14, 2025 AT 11:36

    मैं मानता हूँ कि इस तरह की टैरिफ नीति से वैश्विक सामंजस्य बिगड़ सकता है। सभी पक्षों को मिलकर एक संतुलित समाधान निकालना चाहिए।

  • Shivam Pandit
    Shivam Pandit अक्तूबर 14, 2025 AT 12:43

    दोस्तों, इस मुद्दे पर हमें शांति से चर्चा करनी चाहिए; अत्यधिक तनाव से कुछ नहीं बनेगा; आपसी समझ से ही मार्ग मिल सकता है।

  • parvez fmp
    parvez fmp अक्तूबर 14, 2025 AT 13:49

    ओ हो! यही बात है, कमाल का analysis किया तुम्हें! 😂 लेकिन असली बात तो ये है कि सब को मिलकर काम करना चाहिए।

  • s.v chauhan
    s.v chauhan अक्तूबर 14, 2025 AT 14:56

    चलो, अब सब मिलकर एक संयुक्त योजना बनाते हैं; हम सब मिलकर इस आर्थिक धक्का को मात दे सकते हैं; सभी को साथ लेकर चलना ही सबसे बड़़ा कदम होगा।

  • Thirupathi Reddy Ch
    Thirupathi Reddy Ch अक्तूबर 14, 2025 AT 16:03

    वास्तव में यह सभी एक बड़ी साजिश का हिस्सा लगती है; हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि विश्व शक्ति के ग्रिड में बदलाव हमेशा से ही छिपी हुई हुई है।

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