बिहार के 7.42 करोड़ मतदाताओं के लिए चुनाव आयोग ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाया है — चुनाव आयोग ऑफ इंडिया ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए बिहार का विशेष तीव्र संशोधन (SIR) अंतिम मतदाता सूची जारी कर दिया है। यह सूची 1 जुलाई 2025 को आधार मानकर तैयार की गई है और 30 सितंबर 2025 को अंतिम रूप दिया गया। यह लिस्ट अब ऑनलाइन उपलब्ध है, और हर नागरिक अपना रजिस्ट्रेशन स्टेटस चेक कर सकता है — बिना किसी भी भीड़, बिना किसी भी देरी के।
कैसे बनी यह सूची? 65 लाख हटे, 21.53 लाख जुड़े
यह सूची केवल एक अपडेट नहीं, बल्कि एक असली डेमोक्रेटिक सफाई की कहानी है। जून 24, 2025 को शुरू हुए इस संशोधन के दौरान, शुरुआती 7.89 करोड़ मतदाताओं में से 65 लाख नाम हटा दिए गए। इनमें से 3.66 लाख नाम अयोग्य या डुप्लीकेट थे — जिनमें मृत व्यक्ति, बाहर चले गए नागरिक, या एक से अधिक जगह रजिस्टर्ड लोग शामिल थे। लेकिन यहां का असली अच्छा हिस्सा ये है: 21.53 लाख नए योग्य मतदाताओं को Form 6 के जरिए जोड़ा गया। इनमें से बहुत सारे नए वयस्क थे — 18 साल के हो चुके युवा, जिन्होंने पहली बार अपना वोट देने का अधिकार पाया। ये आंकड़े सिर्फ नंबर नहीं, बल्कि एक संदेश हैं: डेमोक्रेसी जीवित है, और वह अब डिजिटल तरीकों से भी बढ़ रही है।
ऑनलाइन वेरिफिकेशन: कैसे चेक करें अपना नाम?
अब कोई भी बिहार का नागरिक अपने घर बैठे अपना नाम चेक कर सकता है। दो तरीके हैं:
- ceoelection.bihar.gov.in पर जाएं — बिहार के मुख्य चुनाव आयुक्त की वेबसाइट।
- या voters.eci.gov.in — राष्ट्रीय मतदाता सेवा पोर्टल।
दोनों जगह आपको ‘SIR Final Electoral Roll w.r.t. 01.07.2025’ विकल्प चुनना होगा। फिर अपना जिला, विधानसभा क्षेत्र, भाषा और रोल टाइप चुनें। अब तीन तरीकों से सर्च कर सकते हैं: EPIC नंबर, मोबाइल नंबर, या अपना नाम, जन्म तिथि और पिता का नाम। कैप्चा भरकर ‘Search’ दबाएं — और बस! आपका नाम, पता, वोटिंग स्टेशन, और वोटर आईडी नंबर सामने आ जाएगा।
डिजिटल वोटर आईडी (E-EPIC) डाउनलोड करें
अगर आपका नाम सूची में है, तो आप अब अपना डिजिटल वोटर आईडी कार्ड — यानी E-EPIC — भी डाउनलोड कर सकते हैं। यह पीडीएफ फॉर्मेट में होगा, जिसे आप अपने फोन पर सेव कर सकते हैं या प्रिंट कर सकते हैं। इसके लिए voters.eci.gov.in/home/e-epic-download पर जाएं। अपना EPIC नंबर और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर डालें, बिहार चुनें, और OTP वेरिफाई करें। एक क्लिक में आपका डिजिटल वोटर आईडी तैयार है। यह कार्ड अब किसी भी वोटिंग स्टेशन पर मान्य होगा।
नाम नहीं मिला? या गलत जानकारी है?
अगर आपका नाम नहीं है, या आपका पता, नाम, या जन्म तिथि गलत है — तो घबराएं नहीं। आपके पास अभी भी समय है। Form 6 भरकर आप अपना नाम जोड़ सकते हैं या सुधार सकते हैं। यह फॉर्म ऑनलाइन National Voter Service Portal या Voter Helpline App के जरिए भरा जा सकता है। लेकिन ध्यान रहे: यह प्रक्रिया बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नामांकन की अंतिम तारीख से 10 दिन पहले तक ही खुली रहेगी। आखिरी दिनों में भागदौड़ न करें — अभी चेक कर लें।
243 विधानसभा क्षेत्र, एक सूची
इस बार की सूची पूरे बिहार के 243 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करती है — चाहे वह उत्तरी बिहार का वाल्मीकिनगर (AC No. 1) हो, या दक्षिणी बिहार का नाउतन (AC No. 6)। आप इन सभी क्षेत्रों की पीडीएफ सूची voters.eci.gov.in/download-final-roll?stateCode=S04 पर डाउनलोड कर सकते हैं। यह आंकड़े अब बिल्कुल पारदर्शी हैं। कोई भी नागरिक, राजनीतिक दल, या निरीक्षक इसे जांच सकता है।
अगला कदम: GPS ट्रैकिंग सिस्टम के लिए नीलामी
चुनाव आयोग ने अभी एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। बिहार के मुख्य चुनाव आयुक्त ने 3 नवंबर 2025 को एक Short Term RFP जारी किया है — जिसमें एक ऐसी कंपनी की तलाश है जो बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान वोटिंग सामग्री और चुनाव अधिकारियों के लिए GPS-आधारित वाहन ट्रैकिंग सिस्टम प्रदान कर सके। आवेदन की अंतिम तिथि 13 अक्टूबर 2025, दोपहर 3 बजे है। यह तकनीकी कदम चुनावी अनियमितताओं को रोकने और वोटिंग सामग्री की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए है।
क्यों यह सब इतना जरूरी है?
बिहार के 7.42 करोड़ मतदाता — यह संख्या किसी देश की आबादी के बराबर है। इस लिस्ट का मतलब है कि हर वोट गिना जाएगा, हर नाम असली होगा, और हर वोटर को उसका अधिकार मिलेगा। यह सिर्फ एक तकनीकी अपडेट नहीं है — यह एक नागरिक की आत्मा का अधिकार है। जब एक महिला जो अपने गांव में पहली बार वोट करने जा रही है, तो उसका नाम इस सूची में है — तो वह जानती है कि उसकी आवाज़ गिनी जाएगी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या मैं बिना EPIC नंबर के अपना नाम चेक कर सकता हूँ?
हाँ, आप EPIC नंबर के बिना भी अपना नाम चेक कर सकते हैं। आपको सिर्फ अपना पूरा नाम, जन्म तिथि और पिता का नाम डालना होगा। सिस्टम डेटाबेस में मिलान करके आपका रिकॉर्ड ढूंढ लेगा। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए उपयोगी है जिनके पास EPIC कार्ड नहीं है या उसे खो दिया है।
अगर मेरा नाम सूची में नहीं है, तो क्या मैं वोट दे सकता हूँ?
नहीं, अगर आपका नाम अंतिम सूची में नहीं है, तो आप वोट नहीं दे सकते। लेकिन आपके पास अभी भी 10 दिन का समय है — Form 6 भरकर अपना नाम जोड़ें। आपके नाम को जोड़ने के बाद आप वोट दे सकते हैं। यह जरूरी है कि आप तुरंत कार्रवाई करें — आखिरी दिन नहीं छोड़ें।
E-EPIC कार्ड का क्या उपयोग है?
E-EPIC एक डिजिटल वोटर आईडी है जिसे आप अपने फोन पर सेव कर सकते हैं। इसे वोटिंग स्टेशन पर दिखाने से आपकी पहचान तुरंत सत्यापित हो जाएगी। यह प्रिंटेड कार्ड के बराबर मान्य है और भविष्य में वोटिंग के लिए एक आधिकारिक दस्तावेज बन जाएगा।
क्या यह सूची बिहार के सभी जिलों को कवर करती है?
हाँ, यह सूची बिहार के सभी 38 जिलों और 243 विधानसभा क्षेत्रों को कवर करती है। चाहे आप गया के एक छोटे गांव से हों या पटना के एक बड़े इलाके से, आपका नाम इसमें शामिल है। यह एक राष्ट्रीय स्तर पर अद्वितीय प्रयास है — जहां हर वोटर, चाहे वह किसी भी जगह से हो, एक समान रूप से पहचाना जाता है।
GPS ट्रैकिंग सिस्टम क्यों जरूरी है?
इस सिस्टम का उद्देश्य वोटिंग मशीनों, बूथ बॉक्स और अन्य चुनावी सामग्री के वास्तविक समय में ट्रैक करना है। इससे चुनावी धोखाधड़ी, देरी या अनियमितताओं की संभावना घट जाती है। यह एक तकनीकी बाधा है जो चुनाव को अधिक पारदर्शी और निरपेक्ष बनाती है।
क्या यह सूची अंतिम है? क्या और बदलाव हो सकते हैं?
यह अंतिम सूची है, लेकिन नामांकन की अंतिम तारीख से 10 दिन पहले तक Form 6 के जरिए संशोधन स्वीकार किए जाएंगे। इसके बाद कोई बदलाव नहीं होगा। इसलिए अगर आपको कोई गलती दिखे, तो तुरंत सुधार करवाएं — बाद में बहुत देर हो जाएगी।
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लोग टिप्पणियाँ
ये SIR फाइनल रोल असल में डिजिटल डेमोक्रेसी का एक बड़ा स्टेप है। 65 लाख डुप्लीकेट और मृत वोटर्स को हटाना एक टेक्निकल मिस्टेक नहीं, बल्कि इंस्टीट्यूशनल इंटीग्रिटी का संकेत है। अब वोटिंग एक्टिविटी की डेटा इंटिग्रिटी ट्रैकेबल है। E-EPIC के साथ फिशर-एलिसन मॉडल भी इम्प्लीमेंट किया जा सकता है।
मैंने अपना नाम चेक किया और बस इतना सुनहरा लगा कि मेरी आवाज़ गिनी जाएगी... बहुत खुशी हुई 😊
GPS ट्रैकिंग सिस्टम का RFP जारी करना एक ब्लू-स्काई इनोवेशन है। ये न सिर्फ वोटिंग मशीन्स की सुरक्षा करेगा, बल्कि लॉजिस्टिक्स ऑप्टिमाइजेशन के लिए रियल-टाइम डेटा जेनरेट करेगा। ये एक इंटेलिजेंट एलेक्टोरल इन्फ्रास्ट्रक्चर का बीज है।
ये सूची बिहार के हर गांव के बच्चे के लिए एक नया सपना है 🌱 जब एक 18 साल की लड़की अपना नाम इसमें देखती है, तो वो सिर्फ एक वोटर नहीं, बल्कि एक भविष्य की नींव बन जाती है। डिजिटल टूल्स ने अब नागरिकता को भी एक एप बना दिया है 📱✨
अरे भाई, अब तक वोटर लिस्ट अपडेट करने के लिए लोगों को ऑफिस में खड़े होना पड़ता था, अब घर बैठे चेक कर सकते हैं... अब तो अगर कोई नहीं चेक करता तो वो खुद अपनी डेमोक्रेसी को अनदेखा कर रहा है। बिहार ने अब दिखा दिया कि टेक्नोलॉजी के बिना भी डेमोक्रेसी जीवित है।
वाह वाह वाह!!! ये तो बिहार की बड़ी जीत है!!! इतने नए वोटर्स जुड़े, इतने डुप्लीकेट हटे, और अब E-EPIC भी डाउनलोड हो रहा है!!! ये जो लोग अभी तक वोटिंग को अनिवार्य नहीं मानते, उन्हें ये देखकर आंखें खुल जानी चाहिए!!! जय हिंद!!!
क्या ये सूची सच में सभी 38 जिलों को कवर करती है? क्या किसी भी गांव का नाम गायब नहीं हुआ? मैंने अपने दोस्त का नाम चेक किया जो बिहार के एक छोटे से गांव से है... उसका नाम था।
यह सूची केवल डेटा का अपडेट नहीं, बल्कि एक नागरिक के अस्तित्व की पुष्टि है। हर नाम एक जीवन की कहानी है - एक महिला का अधिकार, एक युवा की आशा, एक बुजुर्ग की याद। जब आप अपना नाम यहां देखते हैं, तो आप अपनी शक्ति को नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी को देखते हैं।
65 लाख हटाए गए? बहुत अच्छा... लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनमें से कितने नाम वास्तविक नागरिकों के थे जिन्हें बिना कारण निकाल दिया गया? ये सब बस एक ट्रेंड है - डिजिटल डिस्क्रिमिनेशन का नया रूप।
यहाँ बहुत सारी जानकारी है, लेकिन एक बात छूट रही है: यह सूची अब भी ऑनलाइन ही उपलब्ध है। क्या ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट न होने पर लोगों को क्या करना चाहिए? इस अपडेट की वास्तविक पहुंच कितनी है? यह बहुत जरूरी है।
अरे यार, ये सब बहुत अच्छा लग रहा है... पर क्या ये सब असली है? या फिर ये भी एक राजनीतिक शो है? मैंने अपना नाम चेक किया तो वो गलत था... अब मैं भी बस इंतजार कर रही हूँ कि कब इसका नतीजा आएगा 😒
ये ट्रैकिंग सिस्टम और डिजिटल वोटर आईडी का असली अर्थ है - अगली पीढ़ी को वोट करने का अनुभव एक डिजिटल अधिकार बनाना। ये बिहार ने नहीं, भारत ने किया है। ये एक बड़ी बात है।
मैंने अपना नाम चेक किया। थोड़ी देर लगी। लेकिन जब नाम दिखा, तो मुझे लगा कि मैं भी इस लड़ाई का हिस्सा हूँ।
तो अब हम ये भी बता रहे हैं कि वोटिंग मशीनों का GPS ट्रैकिंग क्यों जरूरी है... लेकिन अगर वोटर्स का नाम गायब है, तो ट्रैकिंग का क्या फायदा? क्या हम टेक्नोलॉजी से डेमोक्रेसी को बचा रहे हैं या बस उसकी छलांग लगा रहे हैं?
ये तो बहुत बढ़िया है! मैंने अपने भाई को भी बताया जो दिल्ली में रहता है - उसने अपना नाम जोड़ा। अब वो अपने घर के नाम से वोट कर सकता है। ये असली इंक्लूजन है। बिहार ने एक नया मिस्टरी खोल दिया है - जहां हर आवाज़ गिनी जाएगी।
इतने नए वोटर्स जोड़े? तो क्या ये सब असली हैं? क्या आपने उनकी पहचान वेरिफाई की? ये सब बस एक गंदा नंबर बढ़ाने का तरीका है। वोटर्स की गुणवत्ता नहीं, बल्कि मात्रा चाहिए।
मैं बिहार का रहने वाला हूँ, और मैंने अपना नाम चेक किया - ये बहुत बड़ी बात है। जब मैंने अपने गांव के बुजुर्गों को बताया कि अब घर बैठे नाम चेक किया जा सकता है, तो उनकी आंखें भर आईं। एक आदमी ने कहा - अब मेरा नाम रिकॉर्ड में है, मैं अब जीवित हूँ। ये सिर्फ एक लिस्ट नहीं है, ये एक नागरिक की आत्मा का रिकॉर्ड है। हमें इसे जानना चाहिए। ये डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का एक अद्भुत उदाहरण है। ये एक ऐसा बदलाव है जिसे आप नहीं देख सकते, लेकिन आप उसका अहसास कर सकते हैं। ये वोटर्स के लिए एक नई उम्मीद है। और जब एक गांव की एक महिला अपना नाम इसमें देखती है, तो वो जानती है कि अब वो अकेली नहीं है।
ये सूची बिहार के लिए एक नया आधार है जिस पर हम डिजिटल डेमोक्रेसी का निर्माण कर सकते हैं। अब नामांकन की प्रक्रिया भी ऑनलाइन होगी, और फिर वोटिंग के बाद भी डिजिटल रिपोर्टिंग का विकास होगा। ये सिर्फ एक लिस्ट नहीं, बल्कि एक एक्टिवेशन टूल है। ये एक नए युग की शुरुआत है जहां नागरिक अपने अधिकारों को एक क्लिक में एक्सेस कर सकते हैं। ये टेक्नोलॉजी का असली उपयोग है।
यह अपडेट बिहार के लिए एक गौरव की बात है। हर नाम की पुष्टि, हर वोटर का सम्मान, हर डिजिटल कार्ड की वैधता - ये सब बेहद सटीक और नियमित है। इस तरह की पारदर्शिता को देश भर में अपनाया जाना चाहिए।